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Showing posts from July, 2020

मांस खाना महापाप है

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मुरगे से मुल्लां भये, मुल्लां फेरि मुरग। गरीबदास दोजख धसैं, पाया नहीं सुरग।। परमात्मा कबीर जी ने कहा कि हे काजी तथा मुल्ला! सुनो, आप मुर्गे को मारते हो तो पाप है। आगे किसी जन्म में मुर्गा तो काजी बनेगा, काजी मुर्गा बनेगा, तब वह मुर्गे वाली आत्मा मारेगी। स्वर्ग नहीं मिलेगा, नरक में जाओगे।

जीव हत्या महा पाप है

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मुरगे से मुल्लां भये, मुल्लां फेरि मुरग। गरीब दास दोजख धसैं, पाया नहीं सुरग।। परमात्मा कबीर जी ने कहा कि हे काजी तथा मुल्ला! सुनो, आप मुर्गे को मारते हो तो पाप है। आगे किसी जन्म में मुर्गा तो काजी बनेगा, काजी मुर्गा बनेगा, तब वह मुर्गे वाली आत्मा मारेगी। स्वर्ग नहीं मिलेगा, नरक में जाओगे।

मांस खाना महापाप है

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मांस खाना महापाप है।मांस खाना परमात्मा का आदेश नहीं है यदि फिर भी हम परमात्मा की बातों पर नहीं चलते तो कोरोना वायरस क्या अन्य भयंकर वायरस भी उतपन्न हो सकते हैं।

शिवजी की मृत्यु होती है

शास्त्रों में प्रमाण है कि सभी देवताओं, ब्रह्मा विष्णु महेश, माता दुर्गा, ब्रह्म की जन्म-मृत्यु होती है। इनके दिन और वर्ष दिव्य होते हैं इसलिए आयु बहुत अधिक होती है। लेकिन मृत्यु निश्चित होती है। ब्रह्मा‌ जी की आयु 100 वर्ष, तथा विष्णु जी की उनसे 7 गुना अधिक यानि 700 वर्ष, तथा शिवजी की उनसे 7 गुना अधिक यानि 4900 वर्ष। #MustKnow_RealAgeOfGods

आज का मानव दानव की ओर

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*जीव हमारी जाति है।मानव धर्म हमारा हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नही कोई न्यारा* समस्त मानव जाति वास्तव में ‘‘मानव धर्म‘‘ की अनुयायी है तो फिर जातिवाद और पंथवाद क्यों ? और यदि ये दोनो नही ंतो यहफिर समानता समरसता एकसूत्रता मात्र होनी चाहिए आतंकवाद क्यो ? कारण, हम अपने इसी मानव धर्म को अलग-अलग पर्याय बनाकर अलग- अलग नाम से मानते हैं , जैसा कि इस सम्पूर्ण विश्व समुदाय में मुस्लिम (इस्लाम धर्म), हिन्दू(सनातन धर्म), इसाई (क्रिश्चियन धर्म), सिक्ख (खालसा धर्म), बौध धर्म, जैन धर्म और न जाने कितने अन्य प्रचलित धर्म हंै और समस्त मानव जाति का समूह क्रमशः इन धर्मों को मानता है। किन्तु इन समस्त धर्मांे के संस्थापक या प्रतिपादक या यॅू कह लिजिए कि उ˜वकर्ता सदैव उन्ही चीजों की बात करते चले आ रहे हैं जो मानव का वास्तविक कर्तव्य है। और उन्ही कर्तव्यों की श्रिंखला को एक सिद्धान्त की माला में पिरोकर एक विचार के माध्यम से अनेक तरीको का प्रादुर्भाव किये जिससे कि प्रकृति की उपासना की जा सके और वे आज अलग- अलग धर्माें के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है।        किन्तु इसका द...

गुरु पूर्णिमा की आवश्यकता

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तत्त्वज्ञान के अभाव से शास्त्रा के विपरित साधना करके हिन्दू धर्म के सन्यासी तथा मुसलमान धर्म के शेख कुम्हार के घर गधे बनेंगे यानि मोक्ष तो होगा नहीं, पशु शरीर मिलेगा।

सबका पिता हजरत आदम है

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*गीता तेरा ज्ञान अमृत* पुस्तक घर-घर में रखने योग्य है। इसके पढ़ने तथा अमल करने से लोक तथा परलोक दोनों में सुखी रहोगे। पापों से बचोगे, घर की कलह समाप्त हो जाएगी। Sadhana tv 7:30pm

श्रवण के सोमवार

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*संसारिक परम्परा व लोक उधार पर मानते हैं।* *16 सोमवार व्रत से भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है.* भगवान शंकर देवों के देव, महादेव कहलाते हैं, इसलिए इनकी जय पूजा करके मनचाहे फल पाए जा सकते हैं. वैसे तो यह व्रत कोई भी कर सकता है, फिर भी कुंवारी कन्याएं विशेष रूप से इस व्रत को विधि-विधान से करके मनचाहा वर पा सकती हैं. ऐसे करें शि‍व की पूजा: सोमवार का व्रत श्रावण, चैत्र, वैसाख, कार्तिक व मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से शुरू किया जाता है. इसे सोलह सोमवार तक पूरी श्रद्धा से रखने से मनभावन फलों की प्रप्ति होती है. व्रतधारी को सूर्योदय से पहले उठकर पानी में कुछ काले तिल डालकर नहाना चाहिए . भगवान शिव का अभिषेक जल या गंगाजल से होता है, परंतु विशेष अवसर व विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूध, दही, घी, शहद, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से अभिषेक की विधि प्रचिलत है. इसके बाद 'ऊँ नमः शिवाय' मंत्र के द्वारा श्वेत फूल, सफेद चंदन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल और गंगाजल या साफ पानी से भगवान शिव और पार्वती का पूजन करना चाहिए . मान्यता है कि अभिषेक के दौरान पूजन...

अनमोल ज्ञान गीता का

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जो सर्व ब्रह्माण्डों की रचना करने वाला (व्यदधाता) सर्व ब्रह्माण्डों का रचनहार (स्वयम्भूः) स्वयं प्रकट होने वाला यह(यथा तथ्य अर्थान्) वास्तव में (शाश्वत्) अविनाशी है (गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में भी प्रमाण है।) भावार्थ है कि पूर्ण ब्रह्म का शरीर का नाम कबीर (कविर देव) है। उस परमेश्वर का शरीर नूर तत्त्व से बना है। परमात्मा का शरीर अति सूक्ष्म है जो उस साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है। इस प्रकार जीव का भी सूक्ष्म शरीर है जिसके ऊपर पाँच तत्त्व का खोल (कवर) अर्थात् पाँच तत्त्व की काया चढ़ी होती है जो माता-पिता के संयोग से (शुक्रम) वीर्य से बनी है। शरीर त्यागने के पश्चात् भी जीव का सूक्ष्म शरीर साथ रहता है। वह शरीर उसी साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है।  अधिक जानकारी हेतु पढ़ें अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा

अनमोल ज्ञान गीता का

जो सर्व ब्रह्माण्डों की रचना करने वाला (व्यदधाता) सर्व ब्रह्माण्डों का रचनहार (स्वयम्भूः) स्वयं प्रकट होने वाला यह(यथा तथ्य अर्थान्) वास्तव में (शाश्वत्) अविनाशी है (गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में भी प्रमाण है।) भावार्थ है कि पूर्ण ब्रह्म का शरीर का नाम कबीर (कविर देव) है। उस परमेश्वर का शरीर नूर तत्त्व से बना है। परमात्मा का शरीर अति सूक्ष्म है जो उस साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है। इस प्रकार जीव का भी सूक्ष्म शरीर है जिसके ऊपर पाँच तत्त्व का खोल (कवर) अर्थात् पाँच तत्त्व की काया चढ़ी होती है जो माता-पिता के संयोग से (शुक्रम) वीर्य से बनी है। शरीर त्यागने के पश्चात् भी जीव का सूक्ष्म शरीर साथ रहता है। वह शरीर उसी साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है। इस प्रकार परमात्मा व जीव की स्थिति को समझें। वेदों में ओ3म् नाम के स्मरण का प्रमाण है जो केवल ब्रह्म साधना है। इस उद्देश्य से ओ3म् नाम के जाप को पूर्ण ब्रह्म का मान कर ऋषियों ने भी हजारों वर्ष हठयोग (समाधि लगा कर) करके प्रभु प्राप्ति की चेष्टा की, परन्तु प्रभु दर्शन नहीं हुए, सिद्धियाँ प्राप्त हो गई। उन्ह...