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ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, 5, सूक्त 162 मंत्र 5, सूक्त 163 मंत्र 1-3 के अनुसार पूर्ण परमात्मा कविर्देव जी हैं जो अपने साधक को मृत्यु के बंधन से भी छुड़वा सकते हैं। लेकिन तीन लोक के भगवान (देवी-देवताओं) में ये सामर्थ्य नहीं है।

गीता अध्याय 15 श्लोक 17 उत्तम पुरुष: तू अन्य:, परमात्मा इती उदाह्यत, यः लोकत्रयम आविश्य, विभर्ति अव्यय: ईश्वर:।

कबीर साहेब की 52 लीलाएं

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शेखतकी द्वारा परमात्मा कबीर साहेब को तलवार से कटवा कर मारने की व्यर्थ कोशिश* अपनी प्रभुता बनाने के लिए एक बार शेखतकी ने कबीर साहेब को तलवार से कटवा कर टुकड़े टुकड़े करने की ठानी। इसके लिए शेखतकी ने कुछ गुंडे तैयार किये। जब परमेश्वर कबीर साहेब जी रात्रि में सोने की लीला कर रहे थे उस समय शेखतकी उन गुंडों के साथ परमात्मा की कुटिया में आया और कबीर परमात्मा पर तलवारों से अंधाधुंध वार किये। जब कबीर साहेब को मृत जानकर सभी वहां से जाने लगे तभी कबीर परमेश्वर उठ खड़े हुए। उनको भूत समझकर सभी गुंडे और शेखतकी डर कर वहां से भाग गए।