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Showing posts from June, 2020

Berojgary mar

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बेरोजगारी समाज के लिए एक अभिशाप है। इससे न केवल व्यक्तियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है बल्कि बेरोजगारी पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। कई कारक हैं जो बेरोजगारी का कारण बनते हैं। यहां इन कारकों की विस्तार से व्याख्या की गई और इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए संभावित समाधान बताये गये हैं।

दिपावली

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भगवान श्री राम के वापिस अयोध्या लौटने की खुशी में वहां के लोगों ने इस दिन को दीवाली के रूप में मनाया। दिवाली का त्यौहार हर साल अक्टूबर या नवम्बर माह में आता है। ण्ण्ण् दीवाली के दिन सभी लोग अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों को मिठाईए गिफ्ट आदि देते हैं। इन दिनो बहुत से लोग पटाखे फुलझड़ीया बम आदि भी जलाते हैं। मगर यह सब उचीत नही है।यह सब गलत परम्पराये है।खुशीया किस बात की मनुष्य मात्र दुःखी है काल के लोक मैं सुख शांति कहां रही बात पटाखे फोडने की तो यह तो यह भी बहुत गलत हो रहा है। फटाको से प्रदुषण भेलता हैं। प्रदुषण से तरह तरह की बिमारीया जन्म लेती है।ईससे सुख नही यह तो दुःख को जन्म देता है। भगवान राम के इतिहास को देखे तो प्रभु राम ने अपने जीवन मै संघर्ष और कठिनाई के सिवा कुछ नही देखा भगवान राम की शिक्षा के अनुसार चलने से मनुष्य जन्म सफल होगा दिखावा करने से नही

कबीर साहेब पूर्णब्रह्म है

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साथ सदा रहने वाला है। वह परम अक्षर ब्रह्म गीता ज्ञान दाता से अन्य है, वह कबीर परमात्मा हैं। 💠परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करता है। तब उनकी परवरिश कंवारी गायों के दूध से होती है। ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 यह लीला कबीर परमेश्वर ही आकर करते हैं। 💠ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में कहा गया है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे ऋषि, सन्त व कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर् (कबीर साहेब) ही है। 💠पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। #CompleteGod_KabirSaheb

ब्रम्हाकुमारी पंथ

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#MeatEaters_Are_Sinners ब्रह्माकुमारी पंथ की साधना शास्त्रविरुद्ध है। यह पंथ गीता जी को मानता है परन्तु सर्व क्रियाएँ शास्त्रविरुद्ध करतें है। गीताजी अध्याय 16 श्लोक 23 में प्रमाण है जो व्यक्ति शास्त्रविधि को त्याग कर मनमाना आचरण करते हैं उनको कोई सुख प्राप्त नहीं होता, न ही उनकी गति होती। ब्रम्हाकुमारी पंथ

गुरु पुर्णिमा

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Related:   गुरु का स्थान – गुरु की महत्ता पर प्रेरक कहानी  मानव मन में व्याप्त बुराई रूपी विष को दूर करने में गुरु का विषेश योगदान है। महर्षि वाल्मिकी जिनका पूर्व नाम ‘रत्नाकर’ था। वे अपने परिवार का पालन पोषण करने हेतु दस्युकर्म करते थे। महर्षि वाल्मिकी जी ने रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की, ये तभी संभव हो सका जब गुरू रूपी नारद जी ने उनका ह्दय परिर्वतित किया। मित्रों, पंचतंत्र की कथाएं हम सब ने पढी या सुनी होगी। नीति कुशल गुरू विष्णु शर्मा ने किस तरह राजा अमरशक्ती के तीनों अज्ञानी पुत्रों को कहानियों एवं अन्य माध्यमों से उन्हें ज्ञानी बना दिया। गुरू शिष्य का संबन्ध सेतु के समान होता है। गुरू की कृपा से शिष्य के लक्ष्य का मार्ग आसान होता है। स्वामी विवेकानंद जी को बचपन से परमात्मा को पाने की चाह थी। उनकी ये इच्छा तभी पूरी हो सकी जब उनको गुरू परमहंस का आर्शिवाद मिला। गुरू की कृपा से ही आत्म साक्षात्कार हो सका। छत्रपति शिवाजी  पर अपने गुरू समर्थ गुरू रामदास का प्रभाव हमेशा रहा। गुरू द्वारा कहा एक शब्द या उनकी छवि मानव की कायापलट सकती है। मित्रों, कबीर साहेब जी का अपने ग...

योग से भक्ति योग बहुत बेहतर है

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In Gita chapter 5 verse 2, it is said that there are two types of seekers worshipping against Scriptures, one, a Karma Sannyasi and the other, a Karma Yogi. Both these types of practices because of being Scripture-opposed due to not getting the Shelter of Tatvdarshi Saint cannot lead to welfare. Nevertheless, a Scripture-opposed Karma Yogi seeker (who does yoga, does not do penance, does devotion by staying with the family at home) is better than Scripture-opposed Karma Sannyasi seeker.

महात्मा बुध भगवान नहीं है

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महात्मा बुद्ध को परमात्मा प्राप्ति की प्रबल कसक थी। तभी वो सब कुछ त्यागकर घर से निकल गए। लेकिन पूर्ण गुरु नहीं मिला जिसके कारण शास्त्र विरुद्ध साधना करके जीवन व्यर्थ कर लिया। आज धरती पर पूर्ण गुरु "सतगुरु रामपाल जी महाराज" हैं। उनसे नाम दान लेकर अपना जीवन सफल बनायें।

महावीर जैन का इतिहास

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हमारे जीवन में संघर्ष का बहुत महत्व है। ... हर आदमी का जीवन में कोई न कोई लक्ष्य जरूर होता है। लेकिन अगर उस व्यक्ति को वह लक्ष्य प्राप्त करना है तो संघर्ष करना होगा। बहुत से लोग गरीब रहते हैं, उनके पास कुछ नहीं होता है लेकिन वह संघर्ष कि बदौलत सब कुछ हासिल कर के बुलंदियों तक पहुंचते हैं

आओ जैन धर्म को जाने

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#EternalHome_Satlok जैन धर्म

Kabir is god

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Kabir is god

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कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने। संत गरीबदास जी की वाणी है - न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप। पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।

Kabir prakat Divas

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5June kabir prameshvar prakat Divas Sabi Logo ko prathrna hai ki sabi log 5June ko sadhana channel par Sant rampal ji Maharaj ji ka sathsang jarur sune 9:00am se 12pm tak              🙏  Sat Saheb 🙏

5 जून 2020 कबीर‌ प्रकट दिवस

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मृत गऊ को जीवित करना" सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये। गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए।  तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर (काट) दिया जाएगा। साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया। उसी समय दोनों माँ-बेटा जीवित हो गए। साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग (बाल्टी) भर दी तथा कहा -  गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह।  गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।। चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि। गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।

Kabir is god

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जगन्नाथ के पांडे की कबीर जी द्वारा रक्षा" जगन्नाथ पुरी में एक रामसहाय पाण्डा खिचड़ी का प्रसाद उतार रहा था। गर्म खिचड़ी उसके पैर पर गिर गई। उस समय कबीर जी अपने करमण्डल से हिम जल रामसहाय पाण्डा के पैर पर डाला। उसके तुरंत बाद राहत मिलते ही पैर ठीक हो गया। उस समय कबीर जी ना होते रामसहाय पाण्डा का पैर जल जाता। गरीबदास जी देते हैं - पग ऊपरि जल डालकर, हो गये खड़े कबीर। गरीबदास पंडा जरया, तहां परया योह नीर।। जगन्नाथ जगदीश का, जरत बुझाया पंड। गरीबदास हर हर करत, मिट्या कलप सब दंड।।मृत लड़के कमाल को जीवित करना" शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया।

कबीर परमेश्वर की अद्भुत लीला

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मृत लड़के कमाल को जीवित करना" शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीविऐ  

5 जून कबीर साहेब प्रकट दिवस

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सिकंदर लोधी बादशाह के जलन का असाध्य रोग ठीक करना" कबीर परमेश्वर जी ने दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के जलन का असाध्य रोग आशीर्वाद मात्र से ठीक कर दिया। वह रोग जो किसी काजी, मुल्ला के जंत्र-मंत्र से भी ठीक नहीं हुआ था। स्वामी रामानंद जी को जीवित करना" दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने स्वामी रामानंद जी की गर्दन तलवार से काट दी थी। कबीर साहेब जी ने देखा कि रामानंद जी का धड़ कहीं और सिर कहीं पर पड़ा था। तब कबीर साहेब ने मृत शरीर को प्रणाम किया और कहा कि गुरुदेव उठो। दूसरी बार कहते ही सिर अपने आप उठकर धड़ पर लग गया और रामानंद जी जीवित हो गए। मृत लड़के कमाल को जीवित करना" शेखतकी का कहना था कि अगर कबीर अल्लाह है, तो किसी मुर्दे को जीवित कर दे तो अल्लाह मान लूंगा। सुबह एक 10-12 वर्ष की आयु के लड़के का शव पानी में तैरता हुआ आ रहा था। शेखतकी ने जंत्र-मंत्र से प्रयत्न किया लेकिन लड़का जीवित नहीं हुआ। तब कबीर साहेब ने कहा कि हे जीवात्मा जहाँ भी है, कबीर हुक्म से मुर्दे में प्रवेश कर और बाहर आ। इतना कहा ही था कि शव में कम्पन हुई तथा जीवित होकर बाहर आ गया। भैंसे से वेद मन्त्र बुलवाना" एक...