आज का मानव दानव की ओर
*जीव हमारी जाति है।मानव धर्म हमारा हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नही कोई न्यारा* समस्त मानव जाति वास्तव में ‘‘मानव धर्म‘‘ की अनुयायी है तो फिर जातिवाद और पंथवाद क्यों ? और यदि ये दोनो नही ंतो यहफिर समानता समरसता एकसूत्रता मात्र होनी चाहिए आतंकवाद क्यो ? कारण, हम अपने इसी मानव धर्म को अलग-अलग पर्याय बनाकर अलग- अलग नाम से मानते हैं , जैसा कि इस सम्पूर्ण विश्व समुदाय में मुस्लिम (इस्लाम धर्म), हिन्दू(सनातन धर्म), इसाई (क्रिश्चियन धर्म), सिक्ख (खालसा धर्म), बौध धर्म, जैन धर्म और न जाने कितने अन्य प्रचलित धर्म हंै और समस्त मानव जाति का समूह क्रमशः इन धर्मों को मानता है। किन्तु इन समस्त धर्मांे के संस्थापक या प्रतिपादक या यॅू कह लिजिए कि उ˜वकर्ता सदैव उन्ही चीजों की बात करते चले आ रहे हैं जो मानव का वास्तविक कर्तव्य है। और उन्ही कर्तव्यों की श्रिंखला को एक सिद्धान्त की माला में पिरोकर एक विचार के माध्यम से अनेक तरीको का प्रादुर्भाव किये जिससे कि प्रकृति की उपासना की जा सके और वे आज अलग- अलग धर्माें के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है।
किन्तु इसका दुष्परिणाम यह हो गया कि समस्त मानव जाति के टुकड़े हो गये और आज हम इन्ही के नाम पर लड़ने लगे है।
किन्तु अब समय है पुनः एक नई क्रान्ति लाने का पुनः एक होकर मानव जाति के लिए ही नहीं अपितु इस प्रकृति के लिए सत्य को जानने के लिए मानव धर्म को मुल से जानने के लिए यानि सबका जनक सबका मालिक मानव मात्र का रक्षक सनातन आदि पुरूष जो मानव धर्म का मुल हैं।उसको जानना और अपने मानव जीवन मै उतारना यही मानव मात्र का धर्म है। आइए संकल्प करते हैं चाहे हम वर्तमान में जिस भी धर्म में आस्था रखते हैं उसी कड़ी में मानव धर्म को समावेशित करें, और अपने अमूल्य समय से थोड़ा सा समय और थोड़ा सा नहीं अपितु न के बराबर धन जनकल्याणकारी, प्रकृति कल्याणकारी गतिविधि में व्यय करें, तो इतना पर्याप्त तो नहीं, पर सकारात्मक दिशा में एक कदम होगा। अर्थात इस विचार धारा को हम एकाएक तो नही किन्तु हम सब मिलकर धीरे-धीरे जन मानस तक पॅहुचाकर धीरे-धीरे एक धार्मिक मानव, धार्मिक परिवार, धार्मिक देश और अन्ततः एक धार्मिक विश्व की रथ कल्पना को साकार करने में सहयोग प्रदान कर प्रकृति की उचित आराधनाएं यानि सत्य की खोज कर पाये उस पुर्ण परमात्मा को जान पाये जब तक मानव अपने मुल उद्देश्य को नही जान पायेगा मानव शरीर मिलने का भी कोई लाभ नही
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