अनमोल ज्ञान गीता का
जो सर्व ब्रह्माण्डों की रचना करने वाला
(व्यदधाता) सर्व ब्रह्माण्डों का रचनहार (स्वयम्भूः) स्वयं प्रकट होने वाला यह(यथा तथ्य अर्थान्)
वास्तव में (शाश्वत्) अविनाशी है (गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में भी प्रमाण है।) भावार्थ है
कि पूर्ण ब्रह्म का शरीर का नाम कबीर (कविर देव) है। उस परमेश्वर का शरीर नूर तत्त्व
से बना है। परमात्मा का शरीर अति सूक्ष्म है जो उस साधक को दिखाई देता है जिसकी
दिव्य दृष्टि खुल चुकी है। इस प्रकार जीव का भी सूक्ष्म शरीर है जिसके ऊपर पाँच तत्त्व
का खोल (कवर) अर्थात् पाँच तत्त्व की काया चढ़ी होती है जो माता-पिता के संयोग से
(शुक्रम) वीर्य से बनी है। शरीर त्यागने के पश्चात् भी जीव का सूक्ष्म शरीर साथ रहता है।
वह शरीर उसी साधक को दिखाई देता है जिसकी दिव्य दृष्टि खुल चुकी है।
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