श्राद्ध

श्राद्ध और पिंडदान को लेकर मार्कंडेय पुराण में लिखा है कि ये सब अविद्या यानी अज्ञान के कार्य हैं। मृतक को भोजन खिलाना व्यर्थ है क्योंकि आत्मा नया शरीर धारण कर लेती है।उद्धार केवल जीवित गुरु से दीक्षा लेकर ही संभव है।
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीता 9 शलोक 25 में प्रमाण है
Sant Rampal J i Maharaj

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