श्राद्ध और पिंडदान को लेकर मार्कंडेय पुराण में लिखा है कि ये सब अविद्या यानी अज्ञान के कार्य हैं। मृतक को भोजन खिलाना व्यर्थ है क्योंकि आत्मा नया शरीर धारण कर लेती है।उद्धार केवल जीवित गुरु से दीक्षा लेकर ही संभव है।
#भूतपूजेंगे_वो_भूतबनेंगे गीता 9 शलोक 25 में प्रमाण
महान संत के प्रकट दिवस पर विशेष संदेश आज का दिन मानव समाज के लिए सौभाग्य और आनंद का दिन है। यह वह पावन अवसर है जब एक महान संत ने इस धरती पर अवतरित होकर अज्ञान के अंधकार को मिटाने और सतज्ञान का प्रकाश फैलाने का कार्य किया। उनकी करुणा और तपस्या ने असंख्य जीवों को सच्चे मार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने दिखाया कि सच्ची भक्ति और शास्त्रानुसार साधना से ही जीव परमात्मा तक पहुँच सकता है। इस प्रकट दिवस पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएँ, सद्भाव, करुणा और सत्य का पालन करें। सच्चा संत वही हैं जो अपने लिए नहीं, सबके लिए जीते हैं। जिनकी वाणी अमृत है और संग सतलोक का मार्ग बताता है।" ✨
"जहाँ समाज में धर्म के नाम पर झूठ फैलाया जा रहा है, वहीं संत रामपाल जी महाराज जी 'शास्त्रानुकूल भक्ति' का सच्चा मार्ग दिखा रहे हैं। यही सच्चा अध्यात्म है।"
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