भगवान शिव शंकर (महादेव) को संहार करने का विभाग काल ने दिया

माया काली नागिनी, अपने जाये खात। 
कुण्डली में छोड़ै नहीं, सौ बातों की बात।।
स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आदि माया शेराँवाली भी निरंजन की कुण्डली में है। ये अवतार धर कर आते हैं और जन्म-मृत्यु का चक्कर काटते रहते हैं। 

शिव जी अविनाशी व पूर्ण परमात्मा नहीं हैं।
कबीर परमात्मा ही अविनाशी हैं जो सतलोक के मालिक हैं। ब्रह्मा-विष्णु-शिव जी नाशवान परमात्मा हैं। महाप्रलय में ये सब तथा इनके लोक समाप्त हो जाएंगे। 

सामान्य जीव से लेकर ब्रह्मा जी, विष्णु जी तथा शिव जी तक भी सुखी नहीं हैं। क्योंकि इनकी भी मृत्यु होती है। (श्रीमद देवी भागवत पृष्ठ 123) और जब तक जन्म - मरण है तब तक सुख नहीं हो सकता। 

शिव जी अंतर्यामी नहीं हैं। 
क्योंकि वे भस्मागिरी की दुर्भावना नहीं जान पाए थे। 
शिव जी अजरो अमर नहीं हैं क्योंकि वे भस्मासुर के हाथ में भस्मकंडा देखकर भयभीत हो कर जीवन रक्षा के लिए भागे थे।
 

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