पुर्ण संत रामपाल जी महाराज

अध्याय 9 श्लोक 25 में भी प्रमाण है की जो पितरों की पूजा करता है वो पितरों को प्राप्त होता है जो भूत पूजते हैं वो भूत बनते हैं।

मार्कण्डेय पुराण में श्राद्ध कर्म को अविद्या कहा है। ये शास्त्र विरुद्ध है।

जीवित बाप के लठ्ठम लठ्ठा, मूवे गंग पहुचैया। 
जब आवे आसोज का महीना, कौवा बाप बनईयां।

Comments

Popular posts from this blog

कलयुग में सतयुग

कलयुग में सतयुग