भक्ती की शक्ति

ईसी प्रकार यदि कोई किसी
देवी-देव, माता-मसानी, सेढ़-शीतला, भैरो-भूत तथा हनुमान जी की भक्ति करता है तो
उसको उनका लाभ अवश्य होगा, परंतु गीता अध्याय 16 श्लोक 23.24 में तथा अध्याय 7
श्लोक 12.15 तथा 20 से 23 तक में बताए अनुसार व्यर्थ साधना होने से मोक्ष से वंचित रह
जाते हैं। कर्म का फल भी अच्छा-बुरा भोगना पड़ता है। इसलिए यह साधना करके भी हानि
होती है। इसलिए संत गरीबदास जी ने वाणी नं. 38 में कहा है कि :-
गरीब, ऐसा निर्मल नाम है, निर्मल करे शरीर। और ज्ञान मण्डलीक हैं, चकवै ज्ञान कबीर।।
 भावार्थ :- वेदों, गीता, पुराणों, कुरान, बाईबल आदि का ज्ञान तो मण्डलीक यानि
अपनी-अपनी सीमा का है।(क्पअपेपवदंस है) परंतु परमेश्वर कबीर जी द्वारा बताया आध्यात्म
सत्य ज्ञान यानि तत्त्वज्ञान (सूक्ष्मवेद) चक्रवर्ती ज्ञान है जिसमें सब ज्ञान का समावेश है। वह
कबीर वाणी है पढ़ें पुस्तक ज्ञान गंगा।

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